Thursday, 15 August 2019

कृष्ण के भजन : कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे ओ तेरी प्रीत रे




कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे ओ तेरी प्रीत रे
ओ मेरे मोहन मन मीत रे
कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे तेरी प्रीत रे

तेरी मुरलिया जब जब बाजी तेरी राधा तब तब नाची
फिर से आजा फिर से बजा जा प्यार के वो ही गीत रे
ओ मेरे मोहन मन मीत रे
कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे तेरी प्रीत रे

सूनी राहे सूनी निगाहें सूनी है यमुना जी की धारा
सूने सूने गोकुल में भर प्यार के मीठे गीत रे
कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे तेरी प्रीत रे

मात यशोदा कुछ ना बोले नन्द बाबा ना आँखे खोले
गुमसुम- गुमसुम ग्वाल बाल के नैनन बरसे नीर रे
कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे तेरी प्रीत रे

वृन्दावन में गाय चराना गोपियों का माखन चुराना
याद है आया यमुना तट पे गोपियों को चीर रे
कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे तेरी प्रीत रे

राधा तेरी हुई है दीवानी मुख से निकले ना कोई वाणी
करके वादा तेरा जाना आजा गए दिन बीत रे
कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे तेरी प्रीत रे

अपना हाल हम किसको सुनाये तेरी यादे बहुत रुलाये
ना कोई चिठिया ना ही संदेशा क्यों की तूने प्रीत रे
कान्हा कैसे भुलाऊ तेरी प्रीत रे तेरी प्रीत रे

Sawan Ke Bhajan

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